घोटाले का केंद्र बिंदु शराब की खरीद-बिक्री, वितरण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया था, जहां सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला देश के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक है, जिसमें सरकारी राजस्व को करीब 3,200 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाई गई। यह घोटाला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार (2019-2023) के दौरान आबकारी नीति में किए गए बदलावों से जुड़ा है। जांच एजेंसियों (ईडी, ईओडब्ल्यू, एसीबी) के अनुसार, शराब सिंडिकेट ने निजी कंपनियों को अनुचित लाभ देकर, फर्जी बिलिंग, नकली होलोग्राम, अवैध सप्लाई और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए काला धन सफेद किया। घोटाले का केंद्र बिंदु शराब की खरीद-बिक्री, वितरण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया था, जहां सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया। ईडी की रिपोर्ट में इसे “संगठित अपराध” बताया गया है, जिसमें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। कुल 29 आबकारी अधिकारी आरोपी हैं, और जांच में 22 अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया।
घोटाले का तरीका
- नीति बदलाव: 2019 में आबकारी नीति में संशोधन कर शराब वितरण का नियंत्रण निजी कंपनियों को सौंपा गया। पहले सरकारी ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के जरिए शराब पहुंचती थी, लेकिन नई नीति में तीन निजी कंपनियों (ओम साईं बेवरेज, नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा. लि., दिशिता वेंचर्स प्रा. लि.) को सीधे लाइसेंस दिए गए।
- अवैध प्रक्रिया: कंपनियों ने 10% मार्जिन लगाकर शराब बेची, अतिरिक्त उत्पादन की अवैध बिक्री की, और एफएल-10ए लाइसेंस से वैध दिखाया। 2020-21 में विदेशी शराब सप्लाई से 248 करोड़ का नुकसान हुआ।
- मनी लॉन्ड्रिंग: अवैध कमाई को रियल एस्टेट, फर्जी लोन और ट्रांजेक्शन के जरिए सफेद किया गया। सिंडिकेट 2020-2023 तक सक्रिय रहा।
घटनाक्रम का तिथिवार विवरण
| वर्ष/तिथि | मुख्य घटना |
|---|---|
| 2019 | नई आबकारी नीति लागू; घोटाले की शुरुआत, शराब वितरण पर निजी नियंत्रण। |
| 2020-2021 | निजी कंपनियों को लाइसेंस; विदेशी शराब सप्लाई में 248 करोड़ का नुकसान। |
| 2019-2022 | भूपेश बघेल सरकार के दौरान सिंडिकेट सक्रिय; 3,200 करोड़ का घोटाला। |
| जनवरी 2024 | ईओडब्ल्यू-एसीबी ने प्रारंभिक जांच शुरू; 70 नामजद। |
| जुलाई 2025 | 22 आबकारी अधिकारी सस्पेंड; ईडी छापे। |
| अगस्त 2025 | छठी चार्जशीट दाखिल; ओम साईं बेवरेज आदि कंपनियों पर फोकस। |
| सितंबर 2025 | ईडी की 7,000 पेज चार्जशीट; चैतन्य बघेल पर 1,000 करोड़ चैनलाइज का आरोप। |
| अक्टूबर 2025 | चैतन्य बघेल की न्यायिक रिमांड 13 अक्टूबर तक बढ़ी; अनवर ढेबर की पैरोल बढ़ी। |
मुख्य आरोपी और भूमिका
| नाम | भूमिका/आरोप |
|---|---|
| चैतन्य बघेल (भूपेश बघेल के बेटे) | मास्टरमाइंड; 1,000 करोड़ चैनलाइज, मनी लॉन्ड्रिंग, रियल एस्टेट में निवेश। |
| अनिल टुटेजा (पूर्व आईएएस) | आबकारी विभाग में मिलीभगत; सिंडिकेट संरक्षण। |
| अरुण पति त्रिपाठी (पूर्व सीएसएमसीएल एमडी) | नीति बदलाव में भूमिका; अवैध लाइसेंसिंग। |
| अनवर ढेबर (कारोबारी) | शराब वितरण सिंडिकेट; पैरोल पर। |
| विजय कुमार भाटिया (ओम साईं बेवरेज) | 52% लाभ हिस्सा; 14 करोड़ जुड़े; गिरफ्तार। |
| संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा, अभिषेक सिंह (नेक्सजेन) | 11 करोड़ लाभ; गिरफ्तार। |
| आशीष सौरभ केडिया (दिशिता वेंचर्स) | पूर्व शराब प्रमोटर; लाइसेंस हेराफेरी। |
हाल की घटनाएं (अक्टूबर 2025 तक)
- ईओडब्ल्यू ने 3 महीने में जांच पूरी की; सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर तेजी।
- चैतन्य बघेल की रिमांड 29 अक्टूबर तक बढ़ी; दिवाली जेल में कटेगी।
- अनवर ढेबर को 7 दिन की पैरोल मिली (मां की तबीयत के कारण)।
- 29 अधिकारी आरोपी; कई पर जमानती वारंट। हाईकोर्ट में चैतन्य की याचिका लंबित।
- जांच जारी; ईडी का दावा: घोटाला 3,200 करोड़ से अधिक।
यह घोटाला राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है, जहां विपक्ष इसे कांग्रेस पर हमला बता रहा है। और खुलासे संभव हैं।
चैतन्य बघेल पर आरोप का विस्तार
चैतन्य बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र, पर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के प्रमुख आरोप हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 सितंबर 2025 को रायपुर की विशेष अदालत में उनके खिलाफ 7,039 पेज की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें डिजिटल सबूतों वाली हार्ड डिस्क भी शामिल है। यह घोटाला 2019-2022 के दौरान भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुआ, जिसमें राज्य को 2,100-2,500 करोड़ रुपये की क्षति पहुंची। ईडी के अनुसार, चैतन्य शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर थे और उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की “अपराध की आय” (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को संभाला।
नीचे आरोपों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो ईडी की जांच पर आधारित है।
सिंडिकेट में भूमिका
- चैतन्य सिंडिकेट के “एपेक्स” (शीर्ष) थे, जहां वे अवैध फंडों के संग्रह, चैनलाइजेशन और वितरण पर प्रमुख निर्णय लेते थे।
- उन्होंने सभी अवैध फंडों का “हिसाब” (अकाउंट्स) रखा और मनी लॉन्ड्रिंग में सक्रिय रूप से सहयोग किया।
- सिंडिकेट ने आधिकारिक शराब बिक्री पर कमीशन वसूला, अवैध शराब बेची और डिस्टिलरी वालों से क्विड प्रो क्वो रिश्वत ली, जिसका बाजार हिस्सा बांटा गया।
- 2019 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद, अनिल तुटेजा (तत्कालीन आईएएस) और अनवर ढेबर को दिन-प्रतिदिन के संचालन के लिए फ्रंट फेस चुना गया, लेकिन चैतन्य अंतिम प्राधिकारी थे।
- व्हाट्सएप चैट्स से सबूत: चैतन्य ने अनवर ढेबर और सौम्या चौरसिया (तत्कालीन सीएम कार्यालय उपसचिव) के साथ फंड ट्रांसफर, मीटिंग्स और अकाउंट सेटलमेंट का समन्वय किया।
मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके और रकम
- अवैध फंडों को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में “लेयरिंग” किया, जहां इन्हें वैध संपत्ति के रूप में दिखाया गया।
- विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (मेसर्स बघेल डेवलपर्स) में 18.90 करोड़ रुपये का निवेश अवैध फंडों से किया।
- मेसर्स बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में 3.10 करोड़ रुपये का उपयोग निर्माण और विकास कार्यों में।
- कुल कम से कम 22 करोड़ रुपये (जिसमें 16.70 करोड़ रियल एस्टेट में) अवैध फंडों से इस्तेमाल, जो व्यक्तिगत व्यवसायों में मिलाए गए।
- कैश डिलीवरी: चैतन्य के निर्देश पर लाखों-करोड़ों रुपये कैश इकट्ठा कर राज्य कांग्रेस कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल (फरार) को पहुंचाया गया। लक्ष्मी नारायण बंसल ( पप्पू) ने कबूला कि उन्होंने चैतन्य के साथ 1,000 करोड़ से अधिक संभाले और डिपेन चावड़ा के जरिए अनवर ढेबर से कैश लिया।
- कुल प्रोसीड्स ऑफ क्राइम संभाला: 1,000 करोड़ रुपये से अधिक, जो शराब सिंडिकेट से उत्पन्न हुए।
संलिप्त नेता, अधिकारी एवं दलाल
| नाम | भूमिका/संबंध |
|---|---|
| अनिल तुटेजा (पूर्व आईएएस) | संचालन का फ्रंट फेस; गिरफ्तार। |
| अनवर ढेबर (व्यवसायी) | कैश संग्रह; चैतन्य के निर्देशों पर काम; जनवरी 2025 में गिरफ्तार। |
| लक्ष्मी नारायण बंसल (@ पप्पू) | 1,000 करोड़ से अधिक संभाला; कैश डिलीवरी का जिम्मेदार; चैतन्य के परिवार से पुराना संबंध। |
| राम गोपाल अग्रवाल | राज्य कांग्रेस कोषाध्यक्ष; कैश प्राप्तकर्ता; फरार। |
| सौम्या चौरसिया | सीएमओ उपसचिव; फंड समन्वय। |
| भूपेश बघेल | पूर्व सीएम; बंसल को कैश हैंडलिंग के निर्देश; चैतन्य के साथ घरेलू बैठकें। |
| कवासी लखमा | पूर्व आबकारी मंत्री; गिरफ्तार। |
| अरुण पति त्रिपाठी | पूर्व आईटीएस अधिकारी; गिरफ्तार। |
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
- ईडी ने चैतन्य को मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया, जहां वे अपराध की आय को छिपाने, कब्जाने और उपयोग में साजिश रचे।
- जुलाई 2025 में भिलाई निवास पर छापे के दौरान गिरफ्तार; वर्तमान में न्यायिक हिरासत में।
- ईओडब्ल्यू/एसीबी की मूल एफआईआर में 70 नामजद, लेकिन ईडी की यह चार्जशीट केवल चैतन्य पर केंद्रित है।
- चैतन्य के वकील का दावा: राजनीतिक प्रतिशोध, सबूत कमजोर।
यह आरोप ईडी की जांच पर आधारित हैं, और अदालत में सुनवाई जारी है। और खुलासे संभव हैं।





