ऐसे हादसे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक ‘सिस्टमेटिक क्राइम’ हैं जिसमें ठेकेदार, मालिक और प्रशासन सभी शामिल हैं।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ का औद्योगिक शहर रायगढ़ एक बार फिर मजदूर की मौत से सिहर उठा है। कोतरलिया स्थित इंड सिनर्जी पावर प्लांट, जो कोयला दलाल से फैक्ट्री मालिक बने अनूप बंसल के स्वामित्व में संचालित है, अब मजदूरों का कब्रगाह बनता जा रहा है। यहां आए दिन मानव-हानिकारक हादसे, लापरवाही और औद्योगिक अव्यवस्था की खबरें सामने आती रहती हैं।
ताज़ा मामला उस समय भयावह रूप में सामने आया जब 21 वर्षीय बिहार निवासी मजदूर श्रीकांत कुमार सिंह की ऊंचाई से गिरकर मौत हो गई।
45 फीट की ऊंचाई से गिरा मजदूर, मौके पर ही मौत
जानकारी के अनुसार, इंड सिनर्जी पावर प्लांट में एजी कंस्ट्रक्शन नामक ठेका कंपनी के अधीन कार्य चल रहा था। स्टॉक हॉपर के ऊपर 45 फीट की ऊंचाई पर छत (शेड) निर्माण कार्य के दौरान श्रीकांत कुमार वेल्डिंग कर रहा था। अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधा नीचे जा गिरा। सहकर्मियों ने आनन-फानन में ठेकेदार और प्रबंधन को सूचना दी और उसे मेट्रो अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके बाद शव को मेडिकल कॉलेज रायगढ़ भेजा गया।
प्रबंधन की चुप्पी और जिम्मेदारी से पलायन
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि फैक्ट्री प्रबंधन और ठेकेदार सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों कर रहे हैं। मजदूरों के पास न तो सेफ्टी बेल्ट होती है, न सुरक्षा उपकरण। इस दुर्घटना ने अनूप बंसल मालिक के इंड सिनर्जी ग्रुप की उस क्रूर सच्चाई को उजागर किया है, जिसमें मुनाफे की भूख ने मानव जीवन की कीमत को रौंद दिया है। लेख लिखे जाने तक ठेकेदार या कंपनी का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आया, जो फैक्ट्री में प्रबंधन की संवेदनहीनता और मजदूरों के प्रति उदासीन रवैये को उजागर करता है।
मजदूर संगठनों ने जताया आक्रोश
घटना की सूचना मिलते ही भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल के जिला अध्यक्ष विमल चौधरी और युवा मोर्चा अध्यक्ष चिरंजीव राय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने परिजनों और पुलिस से बातचीत की और मृतक के लिए न्याय की मांग उठाई। संगठन ने ठेकेदार और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। यूनियन नेताओं ने कहा कि अब समय आ गया है जब रायगढ़ की फैक्ट्रियों में हो रहे मानवश्रम के शोषण और मौत के सौदों का खुलासा किया जाए।
‘लालच ने बना दिया मौत का कारोबार’
स्थानीय मजदूर नेताओं का कहना है कि अनूप बंसल की फैक्ट्री में मजदूरों को न सुरक्षा मिलती है, न उचित वेतन। “यहां मजदूरों के पसीने की कीमत नहीं, बल्कि उनकी मौत की कीमत तय की जाती है।” ऐसे हादसे सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक ‘सिस्टमेटिक क्राइम’ हैं जिसमें ठेकेदार, मालिक और प्रशासन सभी शामिल हैं।
कब तक चलती रहेगी मौत की यह फैक्ट्री?
रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में यह कोई पहला हादसा नहीं है। इंड सिनर्जी जैसे कई प्लांटों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और श्रम विभाग सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक ही सीमित रहेंगे, या मजदूरों के जीवन की सुरक्षा के लिए वास्तविक कार्रवाई करेंगे।


