यह लेख विभिन्न जांच एजेंसियों की रिपोर्टों, अदालती फैसलों और समाचार स्रोतों पर आधारित है, जो सरकारी अफसर सौम्या चौरसिया की करतूतों की पूरी कहानी उजागर करता है।
छत्तीसगढ़ राज्य जो कभी राजनीतिक एवं प्रशासनिक रूप से शान्त माना जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है, यह प्रदेश अब प्रशासनिक एवं राजनीतिक भ्रष्टाचार और खुले आम लूट का केंद्र बन चुका है। यहाँ रोज नित नए खोटाले हो रहे हैं। घाटालों की सूची में रोज नए घोटाले उभर रहे हैं। छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाला राज्य की नौकरशाही, राजनीति और उद्योग जगत के गठजोड़ की एक ऐसी गंदी कहानी है, जिसने शासन व्यवस्था की जड़ों में बैठे लुटेरों को बेनकाब किया है।
इस पूरे प्रकरण में सौम्या चौरसिया, जो कभी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कार्यालय की एक प्रभावशाली अधिकारी उपसचिव थीं, इस कथित भ्रष्टाचार की केंद्रीय कड़ी थी। आरोप है कि कोयले के परिवहन पर अवैध लेवी वसूली के माध्यम से करोड़ों रुपये की काली कमाई हुई, जिसे संगठित रूप से सफेद धन में बदला गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग (EOW) की जांचों ने इस घोटाले को उजागर किया, जिसमें सत्ता, प्रशासन और धन के त्रिकोणीय खेल की परतें खुलती चली गईं। सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी, संपत्ति कुर्की, और न्यायालयीय लड़ाई अब इस मामले को छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र के नैतिक पतन का प्रतीक बना चुकी है।
31 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कुल 8 लोगों को जमानत मिली। सौम्या चौरसिया (राज्य प्रसासनिक सेवा – एसएएस), रानू साहू (आईएएस), समीर विश्नोई (आईएसस), सूर्यकांत तिवारी (कोयला कारोबारी), राजिनकांत तिवारी, निखिल चंद्राकर, वीरेंद्र जायसवाल और संदीप नाइक को जमानत मिली थी। ये सभी कोयला लेवी के दो मामले और तीसरा डीएमएफ फंड मामले के दोषी थे। इसमें सूर्यकांत और निखिल को छोड़कर बाकी 6 को सशर्त जमानत दे दी गई थी। बाकी दोनों को अन्य मामलों में गिरफ्तार किया गया था। दावा किया गया है कि कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया था, जिसके चलते वह भी लपेटे में आ चुका है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकार दत्ता की डबल बेंच ने जमानत याचिका पर सुनवाई की थी। जस्टिस सूर्यकांत ने आरोपियों को गवाहों को प्रभावित करने की आशंका के चलते छत्तीसगढ़ में रहने पर पाबंदी लगा रखी है। याचिकाकर्ताओं को निर्देशित किया गया कि वे अंतरिम जमानत पर रिहा होने के तुरंत बाद अपने पासपोर्ट विशेष अदालतों में जमा करें।
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कौन है मास्टर माइंड
कोयला लेवी घोटाले का मास्टर माइंड सूर्यकांत तिवारी को माना जा रहा है। ईडी का दावा है कि छत्तीसगढ़ में कोयले में घोटाला इसी के द्वारा किया गया। इस मामले में 36 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है।
आरोपियों को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी का आरोप था कि कोयले के परिचालन, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने समेत कई तरीकों से करीब 570 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली की गई है। ईडी के अनुसार कोयला मामले में अफसर, राजनेता और बिचौलियों का गिरोह शामिल था। यह लोग छत्तीसगढ़ में आने वाले कोयले में एक टन पर 25 रुपए की वसूली कर रहे थे। घोटाले की इस काली कमाई का उपयोग बेनामी संपत्ति खरीदने, रखूसदार अफसरों के रिश्वत देने और प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां चलाने में होता था।
छत्तीसगढ़ राज्य, जो कोयला भंडार के लिए जाना जाता है, हाल के वर्षों में एक बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार कांड का केंद्र बन गया है। इस कांड को ‘कोयला लेवी घोटाला’ कहा जाता है, जिसमें अनुमानित ₹540-570 करोड़ की राशि का अवैध संग्रह किया गया। इस घोटाले की केंद्रीय हस्ती बनीं सौम्या चौरसिया, एक 2008 बैच की राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अधिकारी, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में उप-सचिव के रूप में कार्यरत रहीं थीं। सौम्या पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत मामला दर्ज है, और उनकी संपत्तियों को अटैच कर लिया गया है।
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घोटाले की पृष्ठभूमि: कोयला लेवी का जाल
छत्तीसगढ़ भारत का प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य है, जहां कोरबा, रायगढ़ और सूरजपुर जैसे जिलों से प्रतिदिन हजारों टन कोयला परिवहन होता है। 2018 से 2023 तक सत्ता में रही कांग्रेस सरकार के दौरान, एक कथित कार्टेल ने कोयला और खनन परिवहन करने वालों से अवैध ‘लेवी’ वसूली की। यह लेवी प्रति टन कोयला पर ₹25 निर्धारित की गई, जो आधिकारिक रूप से पर्यावरण संरक्षण या अन्य योजनाओं के नाम पर लगाई गई थी, लेकिन वास्तव में यह एक संगठित एक्सटॉर्शन रैकेट था। कुल घोटाले की राशि ₹570 करोड़ से अधिक बताई जाती है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक और प्रशासनिक पदाधिकारियों के खातों में गया।
यह कार्टेल न केवल निजी व्यापारियों, बल्कि सीनियर IAS और IPS अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं और उनके सहयोगियों से जुड़ा था। जांच में सामने आया कि लेवी वसूली के लिए ट्रांसपोर्टरों को धमकाया जाता था, और रिश्वत के रूप में नकद या संपत्ति हस्तांतरित की जाती थी। सौम्या चौरसिया इस जाल की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताई गई है, जिन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से ही इस प्रक्रिया को आसान बनाया।

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सौम्या चौरसिया की भूमिका: सत्ता के गलियारों से लूट का रास्ता
सौम्या चौरसिया, जो भूपेश बघेल सरकार में सीएमओ में उप-सचिव के पद पर तैनात थीं, घोटाले में मुख्य आरोपी के रूप में नामित हुईं थीं। उनकी भूमिका न केवल लेवी वसूली को वैध बनाने में थी, बल्कि इससे प्राप्त धन को धोने और बेनामी संपत्तियों में निवेश करने में भी। जांच एजेंसियों के अनुसार, सौम्या ने अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर लगभग 45 अचल संपत्तियां हासिल कीं, जिनकी कुल कीमत ₹47 करोड़ के करीब है। यह राशि उनकी ज्ञात आय (अक्टूबर 2022 तक मात्र ₹85.5 लाख वेतन और भत्तों सहित) से कई गुना अधिक थी।
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भ्रष्टाचार की विधियां: चरणबद्ध तरीके से लूट
सौम्या की करतूतें एक सुनियोजित रणनीति पर आधारित थीं:
एक्सटॉर्शन और लेवी वसूली का संयोजन: सौम्या ने सीएमओ के माध्यम से कोयला परिवहन कंपनियों पर दबाव डाला। ट्रांसपोर्टरों को ‘लेवी’ चुकाने के लिए मजबूर किया जाता था, अन्यथा परमिट रद्द करने या छापे मारने की धमकी दी जाती। यह लेवी कथित रूप से ‘कस्टम मिलिंग’ और ‘पर्यावरण शुल्क’ के नाम पर ली जाती थी, लेकिन वास्तव में यह अवैध थी।
धन शोधन और बेनामी सौदे: प्राप्त नकदी को सौम्या ने रिश्तेदारों जैसे सौरभ मोदी और अनुराग चौरसिया के नाम पर संपत्तियां खरीदने में लगाया। ये संपत्तियां छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में फैली हुई हैं, जिनमें फ्लैट, प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 ऐसी संपत्तियों को ₹39 करोड़ की कीमत से अटैच किया।
राजनीतिक संरक्षण का लाभ: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के करीबी होने के नाते, सौम्या को उच्च स्तरीय संरक्षण प्राप्त था। जांच में अन्य सीनियर अधिकारी जैसे आईएएस रानू साहू, समीर विश्नोई और आईपीएस अधिकारी भी नामित हैं, जो इस कार्टेल का हिस्सा थे। ईडी द्वारा 10 सीनियर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
यह प्रक्रिया 2018 से शुरू होकर 2023 तक चली, जब भाजपा सरकार सत्ता में आई और जांच शुरू हुई। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है और आदिवासी विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री के पद पर सत्तासीन है।
जांच की शुरुआत: गिरफ्तारी से अटैचमेंट तक
घोटाले का पर्दाफाश नवंबर 2022 में ईडी की छापेमारी से हुआ, जब कोयला व्यापारियों के बयानों से अवैध लेवी का खुलासा हुआ। सौम्या की गिरफ्तारी दिसंबर 2022 में हुई, और वह 1.5 वर्ष से अधिक रायपुर सेंट्रल जेल में रही।
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मुख्य घटनाक्रमों का विवरण
- नवंबर 2022: ईडी की प्रारंभिक छापे; कोयला लेवी स्कैम का खुलासा।
- 2 दिसंबर 2022: सौम्या चौरसिया की ईडी द्वारा गिरफ्तारी; मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज।
- जुलाई 2024: आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा पीसी एक्ट के तहत एफआईआर।
- जून 2024: ईओडब्ल्यू ने संपत्ति अटैचमेंट के लिए आवेदन दायर।
- सितंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट से इंटरिम बेल; ईडी की लंबी हिरासत पर आलोचना।
- 31 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने राणू साहू और सौम्या सहित कई अधिकारियों को बेल दी।
- सितंबर 2025: ईओडब्ल्यू ने ₹8 करोड़ की 16 संपत्तियां अटैच कीं – यह छत्तीसगढ़ में पीसी एक्ट के तहत पहली कार्रवाई।
ईओडब्ल्यू ने 1,500 पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सौम्या के सहयोगियों को भी नामित किया गया।
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कोयला लेवी घोटाले के आरोपी
पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव सौम्या चौरसिया
IAS रानू साहू
समीर बिश्नोई
सूर्यकांत तिवारी
संदीप नायक
लक्ष्मीकांत
शिव शंकर नाग
मोइनुद्दीन कुरैशी
रोशन सिंह
निखिल चंद्राकर
परेश कुर्रे
राहुल कुमार
वीरेंद्र जायसवाल
हेमंत जायसवाल
चंद्र प्रकाश जायसवाल।
वर्तमान स्थिति और प्रभाव
अक्टूबर 2025 तक, सौम्या निलंबन की स्थिति में हैं और जांच जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में उनकी इंटरिम बेल को बढ़ाया, लेकिन सेवा में बहाली की अनुमति नहीं दी। ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों एजेंसियां अतिरिक्त संपत्तियों का पता लगा रही हैं। यह मामला न केवल सौम्या की व्यक्तिगत लूट को उजागर करता है, बल्कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार की गहराई को भी दिखाता है।
चुनाव में खर्च की गई कमीशन की राशि
जुलाई 2020 और जून 2022 के बीच परिवहन किए गए कोयले में प्रति टन 25 रुपए चार्ज किए गए। ED ने अपने प्रेस नोट जारी कर बताया था कि कोल लेवी से आने वाले रुपए का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने के लिए किया गया था। साथ ही इसका कुछ हिस्सा चुनावों में भी खर्च किया गया था। बाकी राशि से चल और अचल संपत्तियां खरीदी गई।
इनकी संपत्ति कुर्क की गई है
प्रेस नोट जारी कर ED ने बताया था ये संपत्ति निलंबित IAS रानू साहू, निलंबित आईएएस समीर बिश्नोई राज्य प्रशासनिक सेवा आधिकारी सौम्या चौरसिया, तत्कालीन मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के ओएसडी, जय प्रकाश मौर्य, कांग्रेस नेता राम गोपाल अग्रवाल, राम प्रताप सिंह, विनोद तिवारी, पूर्व विधायक चंद्र देव प्रसाद राय और भिलाई विधायक देवेंद्र सिंह यादव की है।
(bhadas.org)



