छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कार्यालय के पूर्व उपसचिव पर आय से 1872% अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप
रायपुर (bhadas.org): आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विस्तृत चालान पेश किया है। ईओडब्ल्यू ने अदालत को बताया कि सौम्या चौरसिया ने लगभग 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी ज्ञात आय से 1872 प्रतिशत अधिक है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में नेता, अधिकारी और कोयला दलालों द्वारा ‘कोयला लेवी घोटाला’ में अनुमानित ₹540-570 करोड़ की राशि का अवैध संग्रह किया गया।
बताना चाहेंगे कि राज्य में 2018 से 2023 तक सत्ता में रही कांग्रेस सरकार के दौरान एक बड़े पैमाने पर अवैध वसूली तंत्र (लेवी रैकेट) सक्रिय रहा। जांच एजेंसियों के अनुसार, एक कथित कार्टेल ने कोयला और खनिज परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन ₹25 की अवैध लेवी वसूली।
यह वसूली पर्यावरण संरक्षण और विकास योजनाओं के नाम पर की जाती थी, लेकिन वास्तव में यह एक संगठित उगाही नेटवर्क था, जिसमें राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता बताई जा रही है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस घोटाले की कुल राशि ₹570 करोड़ से अधिक थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक नेताओं और उच्च पदस्थ अधिकारियों के खातों में पहुंचा।
यह मामला अब राज्य के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक बन गया है।
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आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला
ईओडब्ल्यू ने सौम्या चौरसिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।
पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत रहते हुए उन पर कोयला लेवी घोटाला, डीएमएफ (DMF) और कई अन्य अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप पहले से हैं।
ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में 8000 पृष्ठों का चालान पेश किया है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा आय से अधिक संपत्ति मामला बताया जा रहा है।
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बेनामी संपत्तियों में किया निवेश
ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट के अनुसार, सौम्या चौरसिया ने अपने परिवार और सहयोगियों के नाम पर लगभग 45 अचल संपत्तियों में बेनामी निवेश किया है।
इन संपत्तियों को अलग-अलग नामों से खरीदा गया ताकि वास्तविक स्वामित्व छिपाया जा सके।
जांच एजेंसी का कहना है कि इन निवेशों में अधिकतर धन अवैध स्रोतों से आया है।
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49.69 करोड़ की अवैध कमाई
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि अपने 17 वर्ष के कार्यकाल में सौम्या चौरसिया और उनके परिवार की कुल वैध आय 2.51 करोड़ रुपये थी, जबकि उनके पास 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पाई गई।
जांच के अनुसार, उन्होंने 49.69 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की, जिनमें अधिकतर निवेश साल 2019 से 2022 के बीच किए गए — जब वे मुख्यमंत्री कार्यालय में उपसचिव के पद पर कार्यरत थीं।
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करियर और पदस्थापनाएं
सौम्या चौरसिया ने अपना करियर साल 2005 में लेखा अधिकारी के रूप में शुरू किया था।
साल 2008 में राज्य प्रशासनिक सेवा में चयनित हुईं और बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पहली पोस्टिंग पाई।
साल 2019 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में उपसचिव बनाया गया, जिसके बाद वे सुर्खियों में आईं।
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ईओडब्ल्यू की जांच में बड़े खुलासे
ईओडब्ल्यू के अनुसार, सौम्या चौरसिया ने अपनी वैध आय से 18 गुना अधिक संपत्ति अर्जित की है।
एजेंसी का कहना है कि यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा आय से अधिक संपत्ति का मामला है।
सबसे ज्यादा संपत्ति निवेश 2019 से 2022 के बीच किया गया, जब वे सत्ता के प्रभावशाली पद पर थीं।
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📊 मुख्य तथ्य तालिका (Key Facts Table
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | सौम्या चौरसिया |
| सेवा | 2008 बैच, राज्य प्रशासनिक सेवा |
| पद | पूर्व उपसचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय |
| जांच एजेंसी | आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW), छत्तीसगढ़ |
| कुल वैध आय (17 वर्ष) | ₹2.51 करोड़ |
| कुल संपत्ति पाई गई | ₹50 करोड़ |
| अवैध आय का अनुमान | ₹49.69 करोड़ |
| आय से अधिक संपत्ति प्रतिशत | 1872.86% अधिक |
| बेनामी संपत्तियां | लगभग 45 अचल संपत्तियां |
| निवेश के वर्ष | 2019 – 2022 |
| चालान के पृष्ठ | 8,000 पृष्ठ |
| संबंधित मामले | कोयला घोटाला, डीएमएफ अनियमितताएं, भ्रष्टाचार के आरोप |
| EOW का दावा | यह अब तक का सबसे बड़ा आय से अधिक संपत्ति का मामला |
परिवार के नाम पर करोड़ों की संपत्ति
जांच एजेंसी ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव रही सौम्या चौरसिया ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 49 करोड़ 69 लाख 48 हजार रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की। इन पैसों को उन्होंने अपने परिवार के कई सदस्यों के नाम पर विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश किया।

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17 साल की सेवा में 1872% से अधिक अवैध आय
चार्जशीट के अनुसार, सौम्या चौरसिया ने अपने 17 वर्षों के सरकारी करियर में वैध रूप से केवल 2 करोड़ 51 लाख रुपये की कमाई की। यानी उनकी कुल आय का लगभग 1872.86 प्रतिशत हिस्सा अवैध पाया गया। यह रकम उन्होंने अलग-अलग शहरों में जमीन, मकान, और निवेश के रूप में लगाई।
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बिलासपुर से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर
सौम्या चौरसिया की पहली नियुक्ति डिप्टी कलेक्टर, बिलासपुर के रूप में हुई थी। 2005 में उन्होंने लेखाधिकारी के रूप में कार्य शुरू किया। आगे चलकर वे 2019 में मुख्यमंत्री कार्यालय की उप सचिव बनीं। इसी अवधि में उनकी आय और संपत्ति में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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कोल लेवी घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तारी
2 दिसंबर 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सौम्या चौरसिया को कोयला घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अवैध कोयला वसूली और हवाला लेनदेन से अर्जित धन को संपत्तियों में बदला। जांच में कई बेनामी संपत्तियों का भी खुलासा हुआ है। वर्तमान में वे जमानत पर बाहर हैं।
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अदालत में अब शुरू होगी सुनवाई
विशेष न्यायालय ने चार्जशीट स्वीकार कर ली है। अब अदालत में ट्रायल के दौरान EOW द्वारा जुटाए गए सबूत, बैंक खातों की जांच, बेनामी संपत्तियों की जब्ती और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर सुनवाई होगी।
कोल मामले सभी आरोपी
| क्रमांक | नाम | पद / पहचान |
|---|---|---|
| 1 | कवासी लखमा | पूर्व मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन |
| 2 | देवेंद्र यादव | विधायक – भिलाई |
| 3 | अमरजीत भगत | पूर्व खाद्य मंत्री |
| 4 | बृहस्पत सिंह | पूर्व विधायक |
| 5 | गुलाब कमरो | पूर्व विधायक |
| 6 | शिशुपाल सोरी | पूर्व विधायक |
| 7 | चंद्रदेव प्रसाद राय | पूर्व विधायक – बिलाईगढ़ |
| 8 | यू डी मिंज | पूर्व विधायक |
| 9 | समीर विश्नोई | निलंबित IAS अधिकारी |
| 10 | रानू साहू | निलंबित IAS अधिकारी |
| 11 | सौम्या चौरसिया | पूर्व उप सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय |
| 12 | संदीप कुमार नायक | सहायक खनिज अधिकारी |
| 13 | शिवशंकर नाग | खनिज अधिकारी |
| 14 | सूर्यकांत तिवारी | कोलया दलाल |
| 15 | मनीष उपाध्याय | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 16 | रौशन कुमार सिंह | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 17 | निखिल चंदाकर | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 18 | राहुल सिंह | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 19 | पारिख कुर्रे | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 20 | मोइनुद्दीन कुरैशी | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 21 | विरेंद्र जायसवाल | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 22 | रजनीकांत तिवारी | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 23 | हेमंत जायसवाल | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 24 | जोगिंदर सिंह | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 25 | नवनीत तिवारी | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 26 | दीपेश टांक | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 27 | देवेंद्र डडसेना | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 28 | राहुल मिश्रा | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 29 | रामगोपाल अग्रवाल | तत्कालीन कोषाध्यक्ष, कांग्रेस |
| 30 | राम प्रताप सिंह | तत्कालीन प्रवक्ता, कांग्रेस |
| 31 | विनोद तिवारी | पीईपी |
| 32 | इदरीस गांधी | पीईपी |
| 33 | सुनील कुमार अग्रवाल | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 34 | जय | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 35 | चंद्रप्रकाश जायसवाल | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
| 36 | लक्ष्मीकांत तिवारी | सूर्यकांत तिवारी के अधीनस्थ कर्मचारी |
📜 स्रोत: ED–EOW चार्जशीट

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छत्तीसगढ़ का कोल लेवी घोटाला क्या है?
ED के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन और अनुमति प्रक्रिया में 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। इसके लिए ऑनलाइन परमिट सिस्टम को ऑफलाइन कर दिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इस संबंध में आदेश जारी किया था।

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दो पूर्व मंत्री, विधायक और 36 लोगों पर एफआईआर
ACB/EOW ने ED की रिपोर्ट के आधार पर 2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित कुल 36 व्यक्तियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। इस मामले में IAS रानू साहू, IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।
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आईपीएस अफसरों से संपर्क के सबूत
ED की चार्जशीट के मुताबिक, सौम्या चौरसिया और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में IPS पारूल माथुर, IPS प्रशांत अग्रवाल और IPS भोजराम पटेल भी थे। आरोप है कि इन अफसरों ने विभागीय गुप्त सूचनाएं तिवारी को उपलब्ध कराईं। IPS पारूल माथुर पर यह भी आरोप है कि वे तिवारी के निर्देश पर कोयला वाहनों पर कार्रवाई करती थीं। इसके अलावा, कॉन्स्टेबल अमित कुमार दुबे पर ED अधिकारियों की जासूसी करने का आरोप है।
विस्तार से पढ़िएः मुख्यमंत्री की उपसचिव सौम्या चौरसिया: छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाले की प्रमुख कड़ी
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